शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
भवरुद्र स्तुति (पंचम अनुवाक)
नमो भवाय च रुद्राय च।
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारवैदिक स्तुति
स्वरूपभव और रुद्र
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
संसार के उद्गम (भव) और दुखों को दूर करने वाले (रुद्र) को नमन है 40।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
संसार के दुखों से मुक्ति और शिव कृपा की प्राप्ति
विस्तृत लाभ
संसार के दुखों से मुक्ति और शिव कृपा की प्राप्ति 40।
जप काल
रुद्राभिषेक के मध्य।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
स्वस्ति श्रीगणनायको गजमुखो मोरेश्वरः सिद्धिदः बल्लाळस्तु विनायकस्तथा मढे चिन्तामणिस्थेवर । लेण्याद्रौ गिरिजात्मजः सुवरदो विघ्नेश्वरश्चोझरे ग्रामे रांजणसंस्थितो गणपतिः कुर्यात् सदा मङ्गलम् ॥
ॐ कोदण्डिने नमः
रां रामाय नमः
ॐ मुरारये नमः
ॐ पुरुषोत्तमाय नमः
पूरो मंत्र ईश्वरों वाचा ओम हनुमत वेदर वेग वेग आओ अमुक बंधी को बंधन से छुड़ाओ भेड़ी तोड़ो ताला तोड़ो बंधन धन तोड़ो मोडा अमुक बंधी को बंधन से छुड़ाओ मेरी भक्ति गुरु की शक्ति। पूरो मंत्र ईश्वरों वाचा।