शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
कार्तिकेय मंत्र
ॐ परमधाम्ने नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपपरम पद
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जो मोक्ष-धाम (वैकुंठ) के साक्षात् स्वरूप हैं, उन्हें नमस्कार है।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
मृत्यु के पश्चात् जन्म-मरण के चक्र से छूटकर वैकुंठ धाम (मोक्ष) की प्राप्ति
विस्तृत लाभ
मृत्यु के पश्चात् जन्म-मरण के चक्र से छूटकर वैकुंठ धाम (मोक्ष) की प्राप्ति।
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अभयवरदहस्तः पाशदन्ताक्षमाला सृणिपरशुदधानो मुद्गरं मोदकं च । फलमधिगत सिंहः पञ्चमातङ्गवक्त्रो गणपतिरतिगौरः पातु हेरम्बनामः ॥
शान्तिकर्मणि सर्वत्र तथा दुःस्वप्नदर्शने। ग्रहपीडासु चोग्रासु माहात्म्यं शृणुयान्मम॥ 17
ॐ धनुर्धराय नमः
ॐ जामदग्न्याय विद्महे महावीराय धीमहि तन्नो परशुरामः प्रचोदयात्।
ॐ सर्वपुण्यायै नमः