शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
कार्तिकेय मंत्र
ॐ प्रसादाभिमुख्यै नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
कृपा (प्रसाद) करने हेतु सदैव तत्पर रहने वाली देवी को नमन 16।
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अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
श्रीं विद्याधिष्ठातृदेव्यै स्वाहा वक्षः सदाऽवतु। (स्वरूप: विद्याधिष्ठात्री | लाभ: हृदय व वक्ष-स्थल की रक्षा | अर्थ: विद्या देवी मेरे वक्ष की रक्षा करें) 8
ॐ सुरारिघ्ने नमः
जो महर्षि भृगु के पवित्र वंश को आनंदित करने वाले हैं, उन्हें नमस्कार। (लाभ: कुल-गोत्र की वृद्धि) 19।
ॐ विघ्नकर्त्रे नमः
ॐ जयिने नमः
ॐ कमलाकरतोषितायै नमः