शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
कार्तिकेय मंत्र
ॐ भकाररूपाय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूप'भ' कार बीज
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
'भ' कार (भरण-पोषण बीज) के स्वरूप को नमन।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
जीवन की सभी आवश्यकताओं की स्वतः पूर्ति
विस्तृत लाभ
जीवन की सभी आवश्यकताओं की स्वतः पूर्ति।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ ह्रां ह्रीं ह्रूं ह्रैं ह्रौं ह्रः इति दिग्बन्धः॥
ॐ सोमनन्दनाय नमः
तप्तकाञ्चन संकाशश्चाष्टहस्तो महातनुः । दीप्ताङ्कुशं शरं चाक्षं दन्तं दक्षे वहन् करैः ॥ वामे पाशं कार्मुकं च लतां जम्बू दधत् करैः । रक्तांशुकः सदा भूयाद् दुर्गागणपतिर्मुदे ॥
ॐ वागधिष्ठातृदेव्यै सर्वाङ्गं मे सदाऽवतु। (स्वरूप: वागधिष्ठात्री | लाभ: संपूर्ण शरीर की आध्यात्मिक और भौतिक रक्षा | अर्थ: वाक् की अधिष्ठात्री देवी मेरे संपूर्ण अंगों की रक्षा करें) 8
ॐ कमलजायै नमः
ॐ हृषीकेशाय नमः