सुब्रह्मण्य पंचरत्नम्
षडाननं चन्दनलेपिताङ्गं महोरसं दिव्यमयूरवाहनम् । रुद्रस्य सूनुं सुरलोकनाथं ब्रह्मण्यदेवं शरणं प्रपद्ये ॥
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
जिनके 6 मुख हैं, शरीर पर चंदन का लेप है, ऐसे मयूर वाहन शिवपुत्र की मैं शरण लेता हूँ।
इस मंत्र से क्या होगा?
भय से मुक्ति और ईश्वरीय सुरक्षा
विस्तृत लाभ
भय से मुक्ति और ईश्वरीय सुरक्षा।
जप काल
षष्ठी व्रत के दिन नित्य पाठ।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ कृष्णशक्त्यै नमः
शुद्धं बुद्धं महाप्रज्ञापण्डितं रणपण्डितं। रामं श्रीदत्तकरुणाभाजनं विप्ररंजनम्॥
ॐ श्रीमते नमः
रामोऽद्रिकूटेष्वथ विप्रवासे सानुजोऽव्याद् भरताग्रजो माम्
ॐ उच्छिष्टगणपति देवतायै नमो हृदि।
सिन्दूराभमिभाननं त्रिनयनं च पाशाङ्कुशौ बिभ्राणं मधुमत्कपालमनिशं साद्विन्दुमौलिं भजे । पुष्ट्या श्लिष्टतनुं ध्वजाग्रकरया पद्मोल्लसद्धस्तया तद्योन्याहितपाणिमात्तवसुमत पात्रोल्लसत्पुष्करम् ॥