शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
स्कंद षष्ठी कवचम्
अमरिडर थीर अमराम् पुरिन्थाकुमरन आदि नेञ्जे कुरि
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारकाप्पु
स्वरूपकुमार / देवसेनापति
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
हे मन! उन युवा भगवान के चरणों का ध्यान कर, जिन्होंने देवों के कष्ट दूर करने हेतु युद्ध किया।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
जीवन में आने वाले गंभीर कष्टों का निवारण
विस्तृत लाभ
जीवन में आने वाले गंभीर कष्टों का निवारण।
जप काल
कवच पाठ के आरम्भ में।
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अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ अभीष्टदायै नमः
ईशानः सर्वविद्यानामीश्वरः सर्वभूतानां ब्रह्माधिपतिर्ब्रह्मणोऽधिपतिर्ब्रह्मा शिवो मे अस्तु सदाशिवोम्॥
ॐ तत्सत् भूर्भुवः स्वः तस्मै परब्रह्मणे नमः (गोपाल-तापनी में विभिन्न वर्णनों के साथ प्रयुक्त)
ॐ पुण्डरीकाक्षाय नमः
ॐ पञ्चकूटायै नमः
जो अत्यंत तेजस्वी और महाप्रतापी हैं, उन्हें नमस्कार। (लाभ: व्यक्तित्व में तेज और ओज की वृद्धि) 19।