ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
शास्त्रीय पौराणिक मंत्र

कार्तिकेय मंत्र

ॐ पुलिन्दकन्याभर्त्रे नमः

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

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स्वरूपवल्ली-नाथ
अर्थ एवं भावार्थ

इस मंत्र का अर्थ

पुलिंद कन्या (वन-पुत्री वल्ली) के स्वामी को नमस्कार।

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

सहज प्रेम और प्रकृति से जुड़ाव

विस्तृत लाभ

सहज प्रेम और प्रकृति से जुड़ाव।

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अन्य देवताओं के मंत्र

प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र

ॐ हिरण्यवर्णां हरिणीं सुवर्णरजतस्रजाम्। चन्द्रां हिरण्मयीं लक्ष्मीं जातवेदो म आवह॥

आ नो दिवो बृहतः पर्वतादा सरस्वती यजता गन्तु यज्ञम्। हवं देवी जुजुषाणा घृताची शग्मां नो वाचमुशती शृणोतु॥

ॐ दुराशाय नमः

अनङ्गरङ्गमङ्गलप्रसङ्गभङ्गुरभ्रुवां सविभ्रमससम्भ्रमदृगन्तबाणपातनैः। निरन्तरं वशीकृतप्रतीतनन्दनन्दने कदा करिष्यसीह मां कृपाकटाक्षभाजनम्॥

ॐ कलिगत्यै नमः

पाँचों त्रिशेम चलें, लांगुरिया सलार चलें। भीम की गदा चले, हनुमान की हाँक चले। नाहर की धाक चलै, नहीं चलै, तो हजरत सुलेमान के तखत की दुहाई है। एक लाख अस्सी हजार पीर व पैगम्बरों की दुहाई है। चलो मन्त्र, ईश्वर वाचा। गुरु का शब्द साँचा।