शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
कार्तिकेय मंत्र
सहस्रशीर्षा पुरुषः सहस्राक्षः सहस्रपात्
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारवैदिक स्तोत्र-मंत्र (पुरुष सूक्त)
स्वरूपविराट पुरुष (विष्णु)
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
उस परम पुरुष के सहस्रों सिर, सहस्रों आँखें और सहस्रों पैर हैं; वह संपूर्ण ब्रह्मांड को व्याप्त करके उससे भी परे स्थित है।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
यज्ञ-सिद्धि, लौकिक इच्छाओं की पूर्ति और सृष्टि के मूल तत्व से तादात्म्य
विस्तृत लाभ
यज्ञ-सिद्धि, लौकिक इच्छाओं की पूर्ति और सृष्टि के मूल तत्व से तादात्म्य 32।
जप काल
शालिग्राम अभिषेक, देव-प्रतिष्ठा, और यज्ञ के समय।
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अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ सर्वाद्यायै नमः
ॐ मृतवानरजीवनाय नमः
ॐ उमासुताय नमः
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्॥
एकवेणी जपाकर्णपूरा नग्ना खरास्थिता। लम्बोष्ठी कर्णिकाकर्णी तैलाभ्यक्तशरीरिणी॥ वामपादोल्लसल्लोहलताकण्टकभूषणा। वर्धनमूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयङ्करी॥
ॐ सर्वात्मने नमः