ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
शास्त्रीय पौराणिक मंत्र

कार्तिकेय मंत्र

सहस्रशीर्षा पुरुषः सहस्राक्षः सहस्रपात्

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

जप काउंटर लोड हो रहा है...

प्रकारवैदिक स्तोत्र-मंत्र (पुरुष सूक्त)
स्वरूपविराट पुरुष (विष्णु)
अर्थ एवं भावार्थ

इस मंत्र का अर्थ

उस परम पुरुष के सहस्रों सिर, सहस्रों आँखें और सहस्रों पैर हैं; वह संपूर्ण ब्रह्मांड को व्याप्त करके उससे भी परे स्थित है।

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

यज्ञ-सिद्धि, लौकिक इच्छाओं की पूर्ति और सृष्टि के मूल तत्व से तादात्म्य

विस्तृत लाभ

यज्ञ-सिद्धि, लौकिक इच्छाओं की पूर्ति और सृष्टि के मूल तत्व से तादात्म्य 32।

जप काल

शालिग्राम अभिषेक, देव-प्रतिष्ठा, और यज्ञ के समय।

इसे भी पढ़ें

अन्य देवताओं के मंत्र

प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र