शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
कार्तिकेय मंत्र
ॐ सर्वलोकचारिणे नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपलोक-विचरक
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
तीनों लोकों में अबाध रूप से विचरण करने वाले को नमन।
जप काल
नित्य प्रातः काल, लाल आसन पर बैठकर रुद्राक्ष या लाल चंदन की माला से 108 नामों का क्रमशः उच्चारण करते हुए पुष्प अर्पित करें।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
असौ योऽवसर्पति नीलग्रीवो विलोहितः। उतैनं गोपा अदृशन्नदृशन्नुदहार्यः। उतैनं विश्वा भूतानि स दृष्टो मृडयाति नः॥
ॐ श्रीमते नमः
ॐ दीर्घमायास्वरूपाय नमः।
ॐ शशाङ्कशेखरसुताय नमः
ॐ कबन्धमालाभरणायै नमः
दिव्याद्वृन्दारण्यकल्पद्रुमाधः श्रीमद्रत्नागारसिंहासनस्थौ। श्रीश्रीराधाश्रीलगोविन्ददेवौ प्रेष्ठालीभिः सेव्यमानौ स्मरामि॥