शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
सुब्रह्मण्य पञ्चदशाक्षरी मंत्र
ॐ श्रीं क्लीं ह्रीं ऐं ईं नं लं सौं स र व ण भ व
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारतांत्रिक बीज
स्वरूपसुब्रह्मण्य
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
(यह 15 अक्षरों का बीजात्मक स्वरूप है, जो ब्रह्मांडीय ऊर्जा का साक्षात् नाद प्रकटीकरण है।)
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
उत्तम संतान प्राप्ति, वंश वृद्धि
विस्तृत लाभ
उत्तम संतान प्राप्ति, वंश वृद्धि।
जप काल
कौमार दीक्षा प्राप्त साधक द्वारा विशेष अनुष्ठान।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ त्रिविक्रमाय नमः
नमामि भार्गवं रामं रेणुकाचित्तनन्दनं। मोचिताम्बार्तिमुत्पातनाशनं क्षत्रनाशनम्॥
ॐ वागधिष्ठातृदेव्यै सर्वाङ्गं मे सदाऽवतु। (स्वरूप: वागधिष्ठात्री | लाभ: संपूर्ण शरीर की आध्यात्मिक और भौतिक रक्षा | अर्थ: वाक् की अधिष्ठात्री देवी मेरे संपूर्ण अंगों की रक्षा करें) 8
ॐ योगिने नमः
ॐ करामर्षायै नमः
ॐ कोमलाङ्ग्यै नमः