शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
सुब्रह्मण्य पञ्चदशाक्षरी मंत्र
ॐ श्रीं क्लीं ह्रीं ऐं ईं नं लं सौं स र व ण भ व
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारतांत्रिक बीज
स्वरूपसुब्रह्मण्य
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
(यह 15 अक्षरों का बीजात्मक स्वरूप है, जो ब्रह्मांडीय ऊर्जा का साक्षात् नाद प्रकटीकरण है।)
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
उत्तम संतान प्राप्ति, वंश वृद्धि
विस्तृत लाभ
उत्तम संतान प्राप्ति, वंश वृद्धि।
जप काल
कौमार दीक्षा प्राप्त साधक द्वारा विशेष अनुष्ठान।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ कर्पूरकारणाह्लादायै नमः
ॐ सर्वजनेश्वर्यै नमः
ॐ ह्स्फ्रेँ ख्फ्रेँ ह्स्रौँ ह्स्ख्फ्रेँ ह्सौँ हनुमते नमः॥
ॐ नदीवासाय नमः
क्षरं प्रधानममृताक्षरं हरः क्षरात्मानावीशते देव एकः। तस्याभिध्यानाद्योजनात्तत्त्वभावाद् भूयश्चान्ते विश्वमायानिवृत्तिः॥
जय श्री कृष्ण चैतन्य प्रभु नित्यानन्द श्री अद्वैत गदाधर श्रीवासादि गौर भक्त वृन्द