शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
कार्तिकेय मंत्र
ॐ सुमङ्गल्यै नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारशतनाम मंत्र |
स्वरूपआदिशक्ति भवानी |
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
सदा मंगल करने वाली
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
सर्वांगीण विकास एवं दरिद्रता नाश)
विस्तृत लाभ
सर्वांगीण विकास एवं दरिद्रता नाश)
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ निर्गुणाय नमः
ॐ शूलपाणये नमः
वीरभद्राय अतिक्रूराय रुद्रकोप सम्भवाय सर्वदुष्ट निवर्हणाय हुं फट् स्वाहा।
ॐ वागधिष्ठातृदेव्यै सर्वाङ्गं मे सदाऽवतु। (स्वरूप: वागधिष्ठात्री | लाभ: संपूर्ण शरीर की आध्यात्मिक और भौतिक रक्षा | अर्थ: वाक् की अधिष्ठात्री देवी मेरे संपूर्ण अंगों की रक्षा करें) 8
ॐ सर्वकर्मणे नमः
ॐ पुण्यात्मने नमः