शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
कुमार सूक्त मंत्र 3
तमर्वन्तं न सानसिमरुषं न दिवः शिशुम् । मर्मृज्यन्ते दिवेदिवे ॥
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारवैदिक ध्यान
स्वरूपदिवः शिशु (स्वर्ग का बालक)
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जो स्वर्ग के शिशु के समान तेजस्वी, विजयी और अरुष हैं, उनकी लोग प्रतिदिन वंदना करते हैं।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
नवीन ऊर्जा का संचार और विजय
विस्तृत लाभ
नवीन ऊर्जा का संचार और विजय।
जप काल
प्रतिदिन प्रातःकाल।
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भानुकोटिभास्वरं भवाब्धितारकं परं नीलकण्ठमीप्सितार्थदायकं त्रिलोचनम्।
ॐ वागधिष्ठातृदेव्यै सर्वाङ्गं मे सदाऽवतु। (स्वरूप: वागधिष्ठात्री | लाभ: संपूर्ण शरीर की आध्यात्मिक और भौतिक रक्षा | अर्थ: वाक् की अधिष्ठात्री देवी मेरे संपूर्ण अंगों की रक्षा करें) 8