शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
श्री नरसिंह अनुष्टुप मंत्रराज
ॐ उग्रं वीरं महाविष्णुं ज्वलन्तं सर्वतोमुखम्। नृसिंहं भीषणं भद्रं मृत्युमृत्युं नमाम्यहम्॥
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारश्रुति/मूल मंत्र
स्वरूपउग्र एवं सर्वव्यापक नरसिंह
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
हे उग्र, वीर, महान विष्णु स्वरूप, चारों ओर अग्नि के समान ज्वलंत, सर्वव्यापी मुख वाले, भयंकर, कल्याणकारी और मृत्यु के भी मृत्यु स्वरूप भगवान नरसिंह, मैं आपको नमस्कार करता हूँ।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
सभी प्रकार के भयों (मृत्यु, ग्रह, भूत-पिशाच, शत्रु) का समूल नाश, मोक्ष और परम अभय की प्राप्ति
विस्तृत लाभ
सभी प्रकार के भयों (मृत्यु, ग्रह, भूत-पिशाच, शत्रु) का समूल नाश, मोक्ष और परम अभय की प्राप्ति।
जप काल
त्रिसंध्या (प्रातः, मध्याह्न, सायं) में 11 या 108 बार जप। यह सर्वसिद्धिदायक है।
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