वासुदेवसुतं देवं कंसचाणूरमर्दनम् । देवकीपरमानन्दं कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम् ॥
वासुदेवसुतं देवं कंसचाणूरमर्दनम् । देवकीपरमानन्दं कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम् ॥
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
वासुदेव के पुत्र, कंस और चाणूर जैसे असुरों का वध करने वाले, माता देवकी को परमानन्द देने वाले, जगद्गुरु श्रीकृष्ण की मैं वन्दना करता हूँ 35।
इस मंत्र से क्या होगा?
विद्या, ज्ञान, गुरु-कृपा की प्राप्ति और अज्ञान रूपी राक्षसों (कंस-चाणूर रूपी दुर्गुणों) का नाश
विस्तृत लाभ
विद्या, ज्ञान, गुरु-कृपा की प्राप्ति और अज्ञान रूपी राक्षसों (कंस-चाणूर रूपी दुर्गुणों) का नाश 35।
जप काल
भगवद्गीता-पाठ या शास्त्रों के अध्ययन से पूर्व मंगलाचरण के रूप में।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ संसारार्णवतारिण्यै नमः
ॐ ह्रः ॐ सौं ॐ वैं ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं श्रीजयजय चण्डिकायै नमः। ॐ स्वीं स्वीं विध्वंसय विध्वंसय ॐ प्लूं प्लूं प्लावय प्लावय... (अति विस्तृत तांत्रिक शृंखला)... ॐ चामुण्डायै विच्चे स्वाहा। मम सकल मनोरथं देहि देहि, सर्वोपद्रवं निवारय निवारय... भञ्जय भञ्जय ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं स्वाहा॥
ॐ सहस्राक्ष्यै नमः
ॐ वामनाय नमः
ॐ यो वै रामचन्द्रः स भगवान् ये महादेवतः तस्मै वै नमो नमः भूर्भुवः स्वः
ॐ ब्रह्मण्याय नमः