शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
कार्तिकेय मंत्र
ॐ वासुदेवाय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारप्रथम व्यूह मंत्र
स्वरूपषड्गुण संपन्न वासुदेव
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
मैं सभी गुणों से परिपूर्ण प्रथम व्यूह वासुदेव को नमन करता हूँ।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
ज्ञान, बल, ऐश्वर्य, वीर्य, शक्ति और तेज—इन छह गुणों की पूर्णता और परब्रह्म की प्राप्ति
विस्तृत लाभ
ज्ञान, बल, ऐश्वर्य, वीर्य, शक्ति और तेज—इन छह गुणों की पूर्णता और परब्रह्म की प्राप्ति 9।
जप काल
पाञ्चरात्र दीक्षा या मंदिर अर्चना के समय।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ कबलीकृतमार्तण्डमण्डलाय नमः
द्वादशैतानि नामानि त्रिसंध्यं यः पठेन्नरः। आयुरारोग्यमैश्वर्यं तस्य पुण्यफलप्रदम्॥
ॐ कर्पूरामोदमोदितायै नमः
ॐ ऐं नमः शारदे श्रीं शुद्धे नमः शारदे ऐं वद वद वाग्वादिनि स्वाहा
ॐ अव्यग्राय नमः
ॐ नमो भगवते संहार भैरवाय भूत प्रेत पिशाच ब्रह्म राक्षसान् उच्चाटय उच्चाटय संहारय संहारय सर्व भय छेदनं कुरु कुरु स्वाहा।