शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
कार्तिकेय मंत्र
ॐ विभवे नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारनाम-मंत्र
स्वरूपसर्वसमर्थ प्रभु
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जो अपने संकल्प मात्र से कुछ भी करने में समर्थ (विभु) हैं।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
सामर्थ्य
विस्तृत लाभ
सामर्थ्य
जप काल
नित्य
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
असौ योऽवसर्पति नीलग्रीवो विलोहितः। उतैनं गोपा अदृशन्नदृशन्नुदहार्यः। उतैनं विश्वा भूतानि स दृष्टो मृडयाति नः॥
सर्वाबाधाप्रशमनं त्रैलोक्यस्याखिलेश्वरि। एवमेव त्वया कार्यमस्मद्वैरिविनाशनम्॥
ॐ परंज्योतिषे नमः
राधे कृष्ण राधे कृष्ण कृष्ण कृष्ण राधे राधे । राधे श्याम राधे श्याम श्याम श्याम राधे राधे ॥
ॐ शार्ङ्गिण्यै नमः
प्रतीच्यां उन्मत्त भैरवाय नमः प्रतीच्यां मां रक्ष रक्ष काल कंटकान् भक्ष भक्ष आवाहयाम्यहं इत्र तिष्ठ तिष्ठ हुं फट् स्वाहा।