शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
कार्तिकेय मंत्र
ॐ विजितेन्द्रियाय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपजितेन्द्रिय
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
अपनी समस्त इंद्रियों (काम, क्रोध, लोभ आदि) पर पूर्ण विजय प्राप्त करने वाले।
जप काल
नित्य प्रातः काल, लाल आसन पर बैठकर रुद्राक्ष या लाल चंदन की माला से 108 नामों का क्रमशः उच्चारण करते हुए पुष्प अर्पित करें।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ गोधनेश्वर्यै नमः
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
ॐ श्रीं कृष्णाय श्रीं । श्रीं श्रीं गोविन्दाय गोपालाय गोलोक सुन्दराय सत्याय नित्याय परमात्मने पराय वैखानसाय विराजमूर्तये मेघात्मने श्रीम नरसिंहवपुषे नमः
ॐ निर्गुणायै नमः
देवमुनिप्रवरार्चितलिङ्गं कामदहं करुणाकरलिङ्गम्। रावणदर्पविनाशनलिङ्गं तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम्॥
ॐ योगबद्धायै नमः