शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
श्रीकृष्ण मंत्र
ॐ अध्यक्षरायै नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारसहस्रनाम जप मंत्र;
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
ॐकार (अक्षरों) की अधिष्ठात्री देवी।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
वाक्-सिद्धि और मंत्र-सिद्धि
विस्तृत लाभ
वाक्-सिद्धि और मंत्र-सिद्धि।
जप काल
तुलसी या कमलगट्टे की माला पर जप;
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ शृङ्खलाबन्धमोचकाय नमः
ॐ देव्यै नमः
क्षरं प्रधानममृताक्षरं हरः क्षरात्मानावीशते देव एकः। तस्याभिध्यानाद्योजनात्तत्त्वभावाद् भूयश्चान्ते विश्वमायानिवृत्तिः॥
ॐ ह्रीं श्रीं वीर लक्ष्म्यै नमः।
सृष्टिस्थितिविनाशानां शक्तिभूते सनातनि। गुणाश्रये गुणमये नारायणि नमोऽस्तु ते॥ 18
ॐ ग्रन्थबीजरूपायै स्वाहा मां सर्वतोऽवतु। (अर्थ: ग्रंथों का बीज रूप देवी मेरी सभी दिशाओं से रक्षा करें) 8