शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
श्रीकृष्ण मंत्र
ॐ अग्निगर्भाय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपतेज स्वरूप
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
अग्नि के गर्भ (मूल तेज) को धारण करने वाले को नमस्कार।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
अंतर्निहित सुप्त शक्तियों का जागरण
विस्तृत लाभ
अंतर्निहित सुप्त शक्तियों का जागरण।
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ॐ जाम्बवत्प्रीतिवर्धनाय नमः
श्रीं विद्याधिष्ठातृदेव्यै स्वाहा वक्षः सदाऽवतु। (स्वरूप: विद्याधिष्ठात्री | लाभ: हृदय व वक्ष-स्थल की रक्षा | अर्थ: विद्या देवी मेरे वक्ष की रक्षा करें) 8
ॐ शितिकण्ठाय नमः
ॐ कपालगिरिसंस्थानायै नमः
ॐ ह्रीं क्ष्रौं श्रीं लक्ष्मी नृसिंहाय नमः।
पक्वचूत फलकल्प मञ्जरीमिक्षुदण्ड तिलमोदकैः सह । उद्वहन् परशु हस्त ते नमः श्रीसमृद्धिपतये देव पिङ्गल ॥