शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
स्कंद षष्ठी कवचम्
अमरिडर थीर अमराम् पुरिन्थाकुमरन आदि नेञ्जे कुरि
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारकाप्पु
स्वरूपकुमार / देवसेनापति
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
हे मन! उन युवा भगवान के चरणों का ध्यान कर, जिन्होंने देवों के कष्ट दूर करने हेतु युद्ध किया।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
जीवन में आने वाले गंभीर कष्टों का निवारण
विस्तृत लाभ
जीवन में आने वाले गंभीर कष्टों का निवारण।
जप काल
कवच पाठ के आरम्भ में।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
सृष्टिस्थितिविनाशानां शक्तिभूते सनातनि। गुणाश्रये गुणमये नारायणि नमोऽस्तु ते॥ 18
ह्रीं विद्याधिष्ठातृदेव्यै स्वाहा ओष्ठं सदाऽवतु। (स्वरूप: विद्याधिष्ठात्री | लाभ: होठों और उच्चारण स्थान की रक्षा | अर्थ: विद्या की अधिष्ठात्री देवी मेरे होंठों की सदा रक्षा करें) 8
ॐ कूर्मरूपाय नमः
ॐ धुरन्धराय नमः
ॐ अमितमायाय नमः
ॐ जितेन्द्रियाय नमः