शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
श्रीकृष्ण मंत्र
ॐ अपराधप्रणाशिन्यै नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारसहस्रनाम जप मंत्र;
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जाने-अनजाने हुए सभी अपराधों को क्षमा करने वाली।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
पापों और कर्म-दोषों का नाश
विस्तृत लाभ
पापों और कर्म-दोषों का नाश।
जप काल
तुलसी या कमलगट्टे की माला पर जप;
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
नैऋत्ये क्रोध भैरवाय नमः नैऋत्ये मां रक्ष रक्ष काल कंटकान् भक्ष भक्ष आवाहयाम्यहं इत्र तिष्ठ तिष्ठ हुं फट् स्वाहा।
ॐ कात्यायन्यै नमः
ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ग्लौं गं गणपतये वर वरद सर्वजनं मे वशमानय स्वाहा ॥
ॐ वार्धौमैनाकपूजिताय नमः
शरजन्मा गणाधीश पूर्वजो मुक्तिमार्गकृत् । सर्वागमप्रणेता च वाञ्छितार्थप्रदर्शनः ॥
ॐ जयन्ती मङ्गला काली भद्रकाली कपालिनी। दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तुते॥