शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
श्रीकृष्ण मंत्र
ॐ हरिमर्कटमर्कटाय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपसर्वश्रेष्ठ वानर
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
सभी प्रकार के वानरों और कपीश्वरों में भी सर्वश्रेष्ठ वानर को नमन।
जप काल
नित्य प्रातः काल, लाल आसन पर बैठकर रुद्राक्ष या लाल चंदन की माला से 108 नामों का क्रमशः उच्चारण करते हुए पुष्प अर्पित करें।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ सुभगायै नमः
ॐ अखिलानन्दिन्यै नमः
ॐ स्यमन्तकमणेर्हर्त्रे नमः
ॐ दिगम्बराय नमः
गजेन्द्रवदनं साक्षाच्चलकर्ण सुचामरम् । हेमवर्णं चतुर्बाहुं पाशाङ्कुशधरं वरम् ॥ स्वदन्तं दक्षिणे हस्ते सव्ये त्वाम्रफलं तथा । पुष्करे मोदकं चैव धारयन्तमनुस्मरेत् ॥
ॐ ब्रह्मक्षत्राय विद्महे क्षत्रियान्ताय धीमहि तन्नो रामः प्रचोदयात्