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शास्त्रीय पौराणिक मंत्र

श्रीकृष्ण मंत्र

दुर्गेष्वटव्याजिमुखादिषु प्रभुः पायान्नृसिंहोऽसुरयूथपारिः

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

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प्रकारनारायण कवच रक्षा-मंत्र
स्वरूपउग्र नृसिंह
अर्थ एवं भावार्थ

इस मंत्र का अर्थ

घने वन, युद्ध और संकटपूर्ण स्थानों पर असुरों के शत्रु भगवान नृसिंह मेरी रक्षा करें।

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

घने जंगलों, युद्ध के मैदान और दुर्गम स्थानों पर शत्रुओं और हिंसक जीवों से रक्षा

विस्तृत लाभ

घने जंगलों, युद्ध के मैदान और दुर्गम स्थानों पर शत्रुओं और हिंसक जीवों से रक्षा 61।

जप काल

दुर्गम स्थानों से गुजरते समय।

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