शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
श्रीकृष्ण मंत्र
ॐ गुहावासाय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपगुह्य निवासी
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जो साधक की हृदय-गुहा (हृदय की गहराइयों) में छिपे रहते हैं, उन्हें नमस्कार है।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
आत्म-मंथन
02
बाहर की दुनिया से कटकर स्वयं के भीतर ईश्वरीय तत्त्व की खोज
विस्तृत लाभ
आत्म-मंथन; बाहर की दुनिया से कटकर स्वयं के भीतर ईश्वरीय तत्त्व की खोज।
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इतीदमद्भुतस्तवं निशम्य भानुनन्दिनी करोतु सन्ततं जनं कृपाकटाक्षभाजनम्। भवेत्तदैव सञ्चितत्रिरूपकर्मनाशनं लभेत्तदा व्रजेन्द्रसूनुमण्डलप्रवेशनम्॥
ॐ विराट्सुताय नमः
ॐ निर्द्वन्द्वाय नमः।
ॐ ऐं क्लीं सौः बाले ब्राह्मि ब्रह्मपत्नि ऐं वद वद वाग्वादिनि स्वाहा
ॐ तुष्ट्यै नमः
ॐ क्लीं कृष्णाय गोविन्दाय गोपीजनवल्लभाय पराय परमपुरुषाय परमात्मने परकर्म-मन्त्र-यन्त्र-तन्त्र-औषधास्त्र-शस्त्राणि संहर संहर मृत्योर्मोचय मोचय...