शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे । हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे ॥
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे । हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे ॥
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारहरे कृष्ण महामन्त्र (32-अक्षरी) / तारक महामन्त्र / नाम-जप
स्वरूपराधा-कृष्ण (गौड़ीय मत में 'हरे' भगवान की आह्लादिनी शक्ति राधारानी का सम्बोधन है) तथा कृष्ण-राम 4।
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
हे प्रभु की परम शक्ति (हरे), हे सर्व-आकर्षक भगवान (कृष्ण), हे सर्व-आनन्ददायक प्रभु (राम), कृपया मुझे जन्म-मरण से निकालकर अपनी नित्य आध्यात्मिक सेवा में नियुक्त करें 4।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
कलियुग के समस्त दोषों (क्लेश, पाखण्ड, चिन्ता) का नाश, हृदय की शुद्धि, अकारण शान्ति और शुद्ध कृष्ण-प्रेम की प्राप्ति
विस्तृत लाभ
कलियुग के समस्त दोषों (क्लेश, पाखण्ड, चिन्ता) का नाश, हृदय की शुद्धि, अकारण शान्ति और शुद्ध कृष्ण-प्रेम की प्राप्ति 13।
जप काल
इसके लिए देश, काल या स्थिति का कोई बन्धन नहीं है (नादेशकालनियमः)। इसे चलते-फिरते, संकीर्तन के रूप में या एकांत में माला पर जपा जा सकता है 16।
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