हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे । हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे ॥
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे । हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे ॥
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
हे प्रभु की परम शक्ति (हरे), हे सर्व-आकर्षक भगवान (कृष्ण), हे सर्व-आनन्ददायक प्रभु (राम), कृपया मुझे जन्म-मरण से निकालकर अपनी नित्य आध्यात्मिक सेवा में नियुक्त करें 4।
इस मंत्र से क्या होगा?
कलियुग के समस्त दोषों (क्लेश, पाखण्ड, चिन्ता) का नाश, हृदय की शुद्धि, अकारण शान्ति और शुद्ध कृष्ण-प्रेम की प्राप्ति
विस्तृत लाभ
कलियुग के समस्त दोषों (क्लेश, पाखण्ड, चिन्ता) का नाश, हृदय की शुद्धि, अकारण शान्ति और शुद्ध कृष्ण-प्रेम की प्राप्ति 13।
जप काल
इसके लिए देश, काल या स्थिति का कोई बन्धन नहीं है (नादेशकालनियमः)। इसे चलते-फिरते, संकीर्तन के रूप में या एकांत में माला पर जपा जा सकता है 16।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं आद्य लक्ष्म्यै नमः।
ॐ कलाधारायै नमः
ॐ विश्वशक्त्यै नमः
ॐ क्षत्रवट नरसिंहाय नमः
बिभ्राणः शुक बीजपूर कमलं माणिक्यकुम्भं अङ्कुशं पाशं कल्पलतां च खड्ग विलसत् ज्योतिः सुधानिर्झरः । श्यामेनात्त सरोरुहेण सहितो देवीद्वयेनान्तिके गौराङ्गो वरदान हस्त कमलो लक्ष्मीगणेशोऽवतात् ॥
ॐ रत्नसिंहासनस्थाय नमः।