शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
श्रीकृष्ण मंत्र
ॐ हिरण्यवर्णां हरिणीं सुवर्णरजतस्रजाम्। चन्द्रां हिरण्मयीं लक्ष्मीं जातवेदो म आवह॥
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारवैदिक आवाहन मंत्र
स्वरूपहिरण्मयी लक्ष्मी
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
हे अग्निदेव! स्वर्ण-वर्णा, सोने-चांदी की मालाओं से सुशोभित, आह्लादक देवी लक्ष्मी का मेरे लिए आवाहन करें।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
सर्व-समृद्धि, सुवर्ण-प्राप्ति
विस्तृत लाभ
सर्व-समृद्धि, सुवर्ण-प्राप्ति।
जप काल
प्रातःकाल, अग्नि में घृत-आहुति।
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ॐ पराकाशाय नमः
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ॐ पावकात्मजाय नमः
सिन्दूराभमिभाननं त्रिनयनं च पाशाङ्कुशौ बिभ्राणं मधुमत्कपालमनिशं साद्विन्दुमौलिं भजे । पुष्ट्या श्लिष्टतनुं ध्वजाग्रकरया पद्मोल्लसद्धस्तया तद्योन्याहितपाणिमात्तवसुमत पात्रोल्लसत्पुष्करम् ॥
ॐ परमहंसाय विद्महे महाहंसाय धीमहि तन्नो हंसः प्रचोदयात्।
ॐ क्लीं कृष्णाय राधिकायै श्रेयं नमः