मङ्गल चण्डिका स्तोत्र मंत्र
ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं सर्वपूज्ये देवि मङ्गलचण्डिके ऐं क्रूं फट् स्वाहा॥
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र से क्या होगा?
इसे कल्पतरु माना गया है
विष्णु और ब्रह्मा ने भी अभीष्ट सिद्धियों हेतु इसका जप किया था 56
मंगल दोष शांति हेतु विशेष फलदायी
विस्तृत लाभ
इसे कल्पतरु माना गया है। विष्णु और ब्रह्मा ने भी अभीष्ट सिद्धियों हेतु इसका जप किया था 56। मंगल दोष शांति हेतु विशेष फलदायी।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ वागधिष्ठातृदेव्यै सर्वाङ्गं मे सदाऽवतु। (स्वरूप: वागधिष्ठात्री | लाभ: संपूर्ण शरीर की आध्यात्मिक और भौतिक रक्षा | अर्थ: वाक् की अधिष्ठात्री देवी मेरे संपूर्ण अंगों की रक्षा करें) 8
तन्मामवतु तद्वक्तारमवतु अवतु मामवतु वक्तारमवतु वक्तारम्॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥
जो शांत भाव से सह्याद्रि (और महेंद्र) पर्वत पर निवास करते हैं, उन्हें नमस्कार। (लाभ: जीवन में स्थिरता और भूमि-लाभ) 19।
ॐ मङ्गलदायिने नमः
ॐ दिव्यचक्षुषे नमः।
ॐ धनागारं धनेश्वरी पातु।