शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
श्रीकृष्ण मंत्र
ॐ जङ्घे पातु धराभारहर्ता योऽसौ नृकेसरी
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपपिंडलियां / नृकेसरी
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
पृथ्वी का भार हरने वाले नृकेसरी मेरी पिंडलियों की रक्षा करें। (यात्राओं में थकान व विघ्न का नाश)।
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अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ त्रिलोकात्मने नमः
ॐ प्राज्ञाय नमः
ॐ अध्यात्मयोगकुशलाय नमः
ॐ धनधान्यकर्यै नमः
रक्तो रक्ताङ्गरागां शुक कुसुमायुत तुन्दिलश्चन्द्रमौलिः नेत्रैर्युक्तस्त्रिभिर्वामनकरचरणो बीजपूरं दधानः । हस्ताग्रक्लृप्त पाशाङ्कुश शरवरदो नागवक्त्रो हि भूषो देवः पद्मासनस्थो भवतु सुखकरो भूतये विघ्नराजः ॥
ॐ करमालाशयानन्दायै नमः