कामदेवाय सर्वजनप्रियाय सर्वजनसम्मोहनाय ज्वल ज्वल प्रज्वल प्रज्वल सर्वजनस्य हृदयं मे वशं कुरु कुरु स्वाहा ॥
कामदेवाय सर्वजनप्रियाय सर्वजनसम्मोहनाय ज्वल ज्वल प्रज्वल प्रज्वल सर्वजनस्य हृदयं मे वशं कुरु कुरु स्वाहा ॥
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
जो आध्यात्मिक कामदेव हैं, सर्वजन-प्रिय हैं और सबको सम्मोहित करने वाले हैं, उनका तेज प्रज्वलित हो। वे सभी जनों के हृदय को मेरे (भगवद्-भक्ति के) अनुकूल (वश में) करें 1।
इस मंत्र से क्या होगा?
सर्वाकर्षण, विश्व-प्रेम की जाग्रति और भगवान की भक्ति में सम्मोहन
यह भौतिक नहीं अपितु आध्यात्मिक आकर्षण का मन्त्र है
विस्तृत लाभ
सर्वाकर्षण, विश्व-प्रेम की जाग्रति और भगवान की भक्ति में सम्मोहन। यह भौतिक नहीं अपितु आध्यात्मिक आकर्षण का मन्त्र है 1।
जप काल
इसे स्वर्ण कमल यंत्र (जिसमें दो त्रिकोण और अष्टदल हों) पर भगवान का ध्यान करते हुए आगमिक विधि से जपा जाता है 1।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ कारुण्यामृतपाथोध्यै नमः
ॐ मुनिसंश्रयाय नमः
न पुण्यं न पापं न सौख्यं न दुःखं... चिदानन्दरूपः शिवोऽहम् शिवोऽहम्॥
ॐ परमेश्वराय नमः
ॐ परविद्यापरिहाराय नमः
श्रीं वाग्देवतायै स्वाहा भालं मे सर्वदाऽवतु। (स्वरूप: वाग्देवता | लाभ: मस्तक, आज्ञा चक्र व विचार-केंद्र की रक्षा | अर्थ: श्रीं बीज रूपी वाग्देवता मेरे ललाट की सदा रक्षा करें) 8