शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
श्रीकृष्ण मंत्र
ॐ भीष्ममुक्तिप्रदायकाय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारनाम-जप मन्त्र; ये मन्त्र वासुदेव, बाल-गोपाल, और द्वारकाधीश स्वरूपों का पूर्ण प्रतिनिधित्व करते हैं।
स्वरूपमुक्ति-दाता
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
पितामह भीष्म को मुक्ति प्रदान करने वाले को नमस्कार।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
शान्तिपूर्ण मृत्यु हेतु
विस्तृत लाभ
शान्तिपूर्ण मृत्यु हेतु
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ अव्ययाय नमः
ॐ भक्तवत्सलाय नमः
ईशान्यां संहार भैरवाय नमः ईशाने मां रक्ष रक्ष काल कंटकान् भक्ष भक्ष आवाहयाम्यहं इत्र तिष्ठ तिष्ठ हुं फट् स्वाहा।
ॐ पिङ्गलाक्षाय नमः
ऐमित्येकाक्षरो मन्त्रो मम कण्ठं सदाऽवतु। (स्वरूप: एकाक्षरी बीज | लाभ: कंठ, स्वर-तंत्र और विशुद्धि चक्र की रक्षा, संगीतकारों के लिए अति उत्तम | अर्थ: 'ऐं' रूपी एकाक्षर मन्त्र मेरे कंठ की सदा रक्षा करे) 8
ॐ सेतुकृते नमः