शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
श्रीकृष्ण मंत्र
ॐ सिन्धुसागरसङ्गमाय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपविशाल स्वरूप
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
नदियों और सागर के संगम-स्वरूप विशाल भगवान को नमस्कार।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
हृदय की विशालता हेतु
विस्तृत लाभ
हृदय की विशालता हेतु
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ निधिरव्ययाय नमः
ॐ ह्रां ह्रीं ॐ नमो भगवते महा-वीर-वीराय सर्वदुःख निवारणाय ग्रहमण्डल सर्वभूतमण्डल सर्व-पिशाच-मण्डलोच्चाटन भूत-ज्वर एकाहिक-ज्वर द्वयाहिक-ज्वर त्र्याहिक-ज्वर चातुर्थिक-ज्वर संताप-ज्वर विषम-ज्वर ताप-ज्वर माहेश्वर-वैष्णव-ज्वरान् छिन्दि-छिन्दि यक्ष ब्रह्मराक्षस भूत-प्रेत-पिशाचान् उच्चाटय-उच्चाटय स्वाहा।
अमरिडर थीर अमराम् पुरिन्थाकुमरन आदि नेञ्जे कुरि
ॐ मालिन्यै नमः
ॐ अखिलेश्वर्यै नमः
ॐ हुं हुं शत्रुस्तम्भनाय हुं हुं ॐ फट्