ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
शास्त्रीय पौराणिक मंत्र

कर्णयुग्मं च कण्ठं च कपालं पातु माधवः । कपोलं पातु गोविन्दः केशांश्च केशवः स्वयम् ॥

कर्णयुग्मं च कण्ठं च कपालं पातु माधवः । कपोलं पातु गोविन्दः केशांश्च केशवः स्वयम् ॥

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

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प्रकारश्रीकृष्ण कवच (श्लोक-मन्त्र 2) / संरक्षण मन्त्र
स्वरूपमाधव, गोविन्द, केशव
अर्थ एवं भावार्थ

इस मंत्र का अर्थ

माधव दोनों कानों, कण्ठ और कपाल की रक्षा करें। गोविन्द गालों की तथा स्वयं केशव बालों की रक्षा करें 19।

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

कान, कण्ठ, कपाल और बालों की अदृश्य शक्तियों (विष, अग्नि, तंत्र-बाधा) से रक्षा

विस्तृत लाभ

कान, कण्ठ, कपाल और बालों की अदृश्य शक्तियों (विष, अग्नि, तंत्र-बाधा) से रक्षा 19।

जप काल

पूर्वोक्त कवच पाठ के साथ निरन्तरता में पढ़ा जाता है।

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