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शास्त्रीय पौराणिक मंत्र

क्लीं कृष्णाय गोविन्दाय गोपीजनवल्लभाय स्वाहा

क्लीं कृष्णाय गोविन्दाय गोपीजनवल्लभाय स्वाहा

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

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प्रकारअष्टादशाक्षरी मन्त्र (18-Syllable Mantra) / काम-गायत्री / गोपाल मूल मन्त्र
स्वरूपगोपीजनवल्लभ (वृन्दावन-विहारी यौवन-सम्पन्न श्रीकृष्ण)
अर्थ एवं भावार्थ

इस मंत्र का अर्थ

सर्व-आकर्षक श्रीकृष्ण (काम-बीज 'क्लीं' स्वरूप), जो गोविन्द हैं (गायों और इन्द्रियों के रक्षक) और गोपीजनों के प्राणवल्लभ हैं, उन्हें मैं अपना सर्वस्व आहुत (स्वाहा) करता हूँ 1।

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

इस मन्त्र के अक्षरों से ब्रह्मा ने सृष्टि की रचना की थी

02

इसके जप से साधक को ब्रह्माण्डीय शक्तियों की प्राप्ति, ईश्वर-साक्षात्कार, अतीन्द्रिय ज्ञान और भगवान के सान्निध्य की प्राप्ति होती है

विस्तृत लाभ

इस मन्त्र के अक्षरों से ब्रह्मा ने सृष्टि की रचना की थी। इसके जप से साधक को ब्रह्माण्डीय शक्तियों की प्राप्ति, ईश्वर-साक्षात्कार, अतीन्द्रिय ज्ञान और भगवान के सान्निध्य की प्राप्ति होती है 1।

जप काल

यह एक गुह्य तान्त्रिक मन्त्र है। इसे गुरु-दीक्षा के पश्चात् ध्यान और न्यास-विधि के साथ एकांत में जपना चाहिए।

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