क्लीं कृष्णाय गोविन्दाय गोपीजनवल्लभाय स्वाहा
क्लीं कृष्णाय गोविन्दाय गोपीजनवल्लभाय स्वाहा
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
सर्व-आकर्षक श्रीकृष्ण (काम-बीज 'क्लीं' स्वरूप), जो गोविन्द हैं (गायों और इन्द्रियों के रक्षक) और गोपीजनों के प्राणवल्लभ हैं, उन्हें मैं अपना सर्वस्व आहुत (स्वाहा) करता हूँ 1।
इस मंत्र से क्या होगा?
इस मन्त्र के अक्षरों से ब्रह्मा ने सृष्टि की रचना की थी
इसके जप से साधक को ब्रह्माण्डीय शक्तियों की प्राप्ति, ईश्वर-साक्षात्कार, अतीन्द्रिय ज्ञान और भगवान के सान्निध्य की प्राप्ति होती है
विस्तृत लाभ
इस मन्त्र के अक्षरों से ब्रह्मा ने सृष्टि की रचना की थी। इसके जप से साधक को ब्रह्माण्डीय शक्तियों की प्राप्ति, ईश्वर-साक्षात्कार, अतीन्द्रिय ज्ञान और भगवान के सान्निध्य की प्राप्ति होती है 1।
जप काल
यह एक गुह्य तान्त्रिक मन्त्र है। इसे गुरु-दीक्षा के पश्चात् ध्यान और न्यास-विधि के साथ एकांत में जपना चाहिए।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ वरेण्याय नमः
वीरभद्राय अतिक्रूराय रुद्रकोप सम्भवाय सर्वदुष्ट निवर्हणाय हुं फट् स्वाहा।
अस्य घा वीर ईवतोऽग्नेरीशीत मर्त्यः । तिग्मजम्भस्य मीळ्हुषः ॥
ॐ कलानन्दायै नमः
ॐ महावीराय नमः
कल्हार शालि कमलेक्षुक चाप बाण दन्तप्ररोहक गदी कनकोज्ज्वलाङ्गः । आलिङ्गनोद्यतकरो हरिताङ्गयष्ट्या देव्या दिशत्वभयम् ऊर्ध्वगणाधिपो मे ॥