श्रीकृष्ण मंत्र
ॐ कूर्चजपपरायणायै नमः
जप, संकल्प और उपासना संकेत
जप काउंटर लोड हो रहा है...
इस मंत्र का अर्थ
'हूँ' बीज का निरंतर उच्चारण कर असुरों को डराने और जीतने वाली।
इस मंत्र से क्या होगा?
'हूँ' के उच्चारण से आंतरिक दानवों (अहंकार) का दमन
विस्तृत लाभ
'हूँ' के उच्चारण से आंतरिक दानवों (अहंकार) का दमन।
जप काल
नित्य उपासना, शिवरात्रि या अमावस्या की मध्यरात्रि में रुद्राक्ष या मुण्ड माला से जप।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
सुरासम्पूर्णकलशं रुधिराप्लुतमेव च। दधाना हस्तपद्माभ्यां कूष्माण्डा शुभदास्तु मे॥
ॐ महानन्दाय नमः
ॐ माधवप्रियायै नमः
मुनीन्द्रवृन्दवन्दिते त्रिलोकशोकहारिणि प्रसन्नवक्त्रपङ्कजे निकुञ्जभूविलासिनि। व्रजेन्द्रभानुनन्दिनि व्रजेन्द्रसूनुसङ्गते कदा करिष्यसीह मां कृपाकटाक्षभाजनम्॥ मुनीन्द्र-वन्दिते (ऋषियों द्वारा वंदित)
ॐ प्रधानेशाय नमः
अघोरेभ्योऽथ घोरेभ्यो घोरघोरतरीभ्यश्च। सर्वतः शर्व सर्वेभ्यो नमस्ते रुद्ररूपेभ्यः॥