शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
श्रीकृष्ण मंत्र
ॐ वरप्रभवे नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपवरदाता
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
श्रेष्ठ वरदान देने में समर्थ प्रभु को नमन।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
वर्षों से रुकी हुई मनोकामनाओं की पूर्णता
विस्तृत लाभ
वर्षों से रुकी हुई मनोकामनाओं की पूर्णता।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ सर्वशास्त्रवासिन्यै स्वाहैशान्यां सदाऽवतु। (अर्थ: सभी शास्त्रों में बसने वाली देवी ईशान कोण में रक्षा करें) 8
ॐ श्रीं नमः। (अथवा 'श्रीं')
ॐ अव्यक्ताय नमः
पाँचों त्रिशेम चलें, लांगुरिया सलार चलें। भीम की गदा चले, हनुमान की हाँक चले। नाहर की धाक चलै, नहीं चलै, तो हजरत सुलेमान के तखत की दुहाई है। एक लाख अस्सी हजार पीर व पैगम्बरों की दुहाई है। चलो मन्त्र, ईश्वर वाचा। गुरु का शब्द साँचा।
ॐ दयासाराय नमः
ॐ जयन्ती मङ्गला काली भद्रकाली कपालिनी। दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तुते॥