शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
श्रीकृष्ण मंत्र
ॐ महाबलपराक्रमाय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपमहा-पराक्रमी
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
महान बल और अतुलनीय पराक्रम के स्वामी को नमन।
जप काल
नित्य प्रातः काल, लाल आसन पर बैठकर रुद्राक्ष या लाल चंदन की माला से 108 नामों का क्रमशः उच्चारण करते हुए पुष्प अर्पित करें।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
अवतु माम् ॥ अवतु वक्तारम् ॥ अवतु श्रोतारम् ॥ अवतु दातारम् ॥ अवतु धातारम् ॥ अवानूचानमव शिष्यम् ॥ अव पश्चात्तात् ॥ अव पुरस्तात् ॥ अवोत्तरात्तात् ॥ अव दक्षिणात्तात् ॥ अव चोर्ध्वात्तात् ॥ अवाधरात्तात् ॥ सर्वतो मां पाहि पाहि समन्तात् ॥
ॐ गुणश्रेष्ठाय नमः
ॐ दुर्गमाङ्ग्यै नमः
ॐ त्रिनेत्राय नमः।
ॐ रसज्ञाय नमः
निजं निर्गुणं निर्विकल्पं निरीहं। चिदाकाशमाकाशवासं भजेऽहम्॥