ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
ॐ, मैं सर्वव्यापी भगवान वासुदेव (जो सबमें वास करते हैं) को अपना सर्वस्व नमस्कार (समर्पण) करता हूँ 14।
इस मंत्र से क्या होगा?
यह मन्त्र आध्यात्मिक प्रगति, सर्वपाप नाश, भगवत्प्राप्ति, आत्मशुद्धि और अन्ततः मोक्ष (जन्म-मृत्यु के चक्र से मुक्ति) प्रदान करता है
इसे सभी मन्त्रों का सार माना गया है
विस्तृत लाभ
यह मन्त्र आध्यात्मिक प्रगति, सर्वपाप नाश, भगवत्प्राप्ति, आत्मशुद्धि और अन्ततः मोक्ष (जन्म-मृत्यु के चक्र से मुक्ति) प्रदान करता है। इसे सभी मन्त्रों का सार माना गया है 14।
जप काल
नित्य प्रातःकाल स्नान के पश्चात्, तुलसी की माला पर मानसिक या वाचिक जप। ध्रुव एवं प्रह्लाद ने इसी मन्त्र की उपासना की थी 28।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
श्रीं विद्याधिष्ठातृदेव्यै स्वाहा वक्षः सदाऽवतु। (स्वरूप: विद्याधिष्ठात्री | लाभ: हृदय व वक्ष-स्थल की रक्षा | अर्थ: विद्या देवी मेरे वक्ष की रक्षा करें) 8
ॐ ऐं ह्रीं श्रीं संतान लक्ष्म्यै नमः।
ॐ द्युतिमते नमः
ॐ अनादिनिधनाय नमः
ॐ सर्वदेवस्तुताय नमः
देवि प्रसीद परिपालय नोऽरिभीतेर्नित्यं यथासुरवधादधुनैव सद्यः। पापानि सर्वजगतां प्रशमं नयाशु उत्पातपाकजनितांश्च महोपसर्गान्॥ 18