शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
स्कंद स्तुति
नमो गुहाय भूतानां गुहासु निहिताय च । अणोरणीयसे तुभ्यं महतोऽपि महीयसे ॥
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
जप काउंटर लोड हो रहा है...
प्रकारश्लोक 3
स्वरूपगुह (हृदयवासी)
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
प्राणियों के हृदय रूपी गुफा में छिपे हुए, अणु से भी सूक्ष्म और महान से महान 'गुह' को नमस्कार है।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
अंतर्मन की शुद्धि और परमात्मा की अनुभूति
विस्तृत लाभ
अंतर्मन की शुद्धि और परमात्मा की अनुभूति।
जप काल
गहन ध्यान अवस्था में।
इसे भी पढ़ें
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ करदानपरायणायै नमः
ॐ षड्ग्रन्थिभेदिन्यै नमः
ॐ पुण्यात्मने नमः
ॐ इन्द्रजित्प्रहितामोघब्रह्मास्त्रविनिवारकाय नमः
या रक्ताम्बुजवासिनी विलासिनी चण्डांशुतेजस्विनी, या रक्ता रुधिराम्बरा हरिसखी या श्री मनोल्हादिनी।
देवि प्रसीद परिपालय नोऽरिभीतेर्नित्यं यथासुरवधादधुनैव सद्यः। पापानि सर्वजगतां प्रशमं नयाशु उत्पातपाकजनितांश्च महोपसर्गान्॥ 18