शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
श्रीकृष्ण मंत्र
ॐ नन्दव्रजजनानन्दिने नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
जप काउंटर लोड हो रहा है...
प्रकारनाम-जप मन्त्र; ये मन्त्र वासुदेव, बाल-गोपाल, और द्वारकाधीश स्वरूपों का पूर्ण प्रतिनिधित्व करते हैं।
स्वरूपव्रज-विहारी
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
नन्द-गोकुल (व्रज) के सभी जनों को आनन्दित करने वाले को नमस्कार।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
समाज में यश हेतु
विस्तृत लाभ
समाज में यश हेतु
इसे भी पढ़ें
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ गुह्यं मे पातु गुह्यानां मन्त्राणां गुह्यरूपधृक्
सिंहासनगता नित्यं पद्माञ्चितकरद्वया। शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी॥
ॐ ह्रीं क्लीं वाण्यै स्वाहेति मम पृष्ठं सदाऽवतु। (स्वरूप: वाणी | लाभ: पीठ और मेरुदंड की रक्षा | अर्थ: वाणी मेरी पीठ की सदा रक्षा करें) 8
ॐ ललाटाक्षाय नमः
ॐ डामराय नमः।
ॐ श्रीमते नमः