शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
श्रीकृष्ण मंत्र
ॐ त्रिभङ्गिललिताकृतये नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारनाम-जप मन्त्र; ये मन्त्र वासुदेव, बाल-गोपाल, और द्वारकाधीश स्वरूपों का पूर्ण प्रतिनिधित्व करते हैं।
स्वरूपत्रिभंगी ललित
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
त्रिभंगी (तीन जगह से मुड़ी हुई) सुन्दर आकृति वाले को नमस्कार।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
कला और सौन्दर्य हेतु
विस्तृत लाभ
कला और सौन्दर्य हेतु
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ क्रौञ्चदारणाय नमः
श्रीं वाग्देवतायै स्वाहा भालं मे सर्वदाऽवतु। (स्वरूप: वाग्देवता | लाभ: मस्तक, आज्ञा चक्र व विचार-केंद्र की रक्षा | अर्थ: श्रीं बीज रूपी वाग्देवता मेरे ललाट की सदा रक्षा करें) 8
ॐ स्थिराय नमः
ॐ दक्षाध्वरहराय नमः
तव करकमलवरे नखमद्भुतशृंगं दलितहिरण्यकशिपुतनुभृंगम्। केशव धृतनरहरिरूप जय जगदीश हरे॥
ॐ कदलीगर्भमध्यस्थायै नमः