श्रीकृष्ण मंत्र
सहस्रशीर्षा पुरुषः सहस्राक्षः सहस्रपात्
जप, संकल्प और उपासना संकेत
जप काउंटर लोड हो रहा है...
इस मंत्र का अर्थ
उस परम पुरुष के सहस्रों सिर, सहस्रों आँखें और सहस्रों पैर हैं; वह संपूर्ण ब्रह्मांड को व्याप्त करके उससे भी परे स्थित है।
इस मंत्र से क्या होगा?
यज्ञ-सिद्धि, लौकिक इच्छाओं की पूर्ति और सृष्टि के मूल तत्व से तादात्म्य
विस्तृत लाभ
यज्ञ-सिद्धि, लौकिक इच्छाओं की पूर्ति और सृष्टि के मूल तत्व से तादात्म्य 32।
जप काल
शालिग्राम अभिषेक, देव-प्रतिष्ठा, और यज्ञ के समय।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
यं यं कामयते कामं तं तं प्राप्नोति साधकः। राधाकृपाकटाक्षेण भक्तिः स्यात् प्रेमलक्षणा॥
ॐ श्रीगोपालाय नमः
ॐ कामबीजस्वरूपिण्यै नमः
देवगणार्चितसेवितलिङ्गं भावैर्भक्तिभिरेव च लिङ्गम्। दिनकरकोटिप्रभाकरलिङ्गं तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम्॥
जो शांत भाव से सह्याद्रि (और महेंद्र) पर्वत पर निवास करते हैं, उन्हें नमस्कार। (लाभ: जीवन में स्थिरता और भूमि-लाभ) 19।
ॐ विरजायै नमः