शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
श्रीकृष्ण मंत्र
ॐ सीतारामपादुकासेवायै नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपचरण-सेवक
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
श्री राम और माता सीता के चरणों (पादुकाओं) की नित्य सेवा में तत्पर रहने वाले।
जप काल
नित्य प्रातः काल, लाल आसन पर बैठकर रुद्राक्ष या लाल चंदन की माला से 108 नामों का क्रमशः उच्चारण करते हुए पुष्प अर्पित करें।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ मदोत्कटाय नमः
ॐ वाग्मिने नमः
ॐ यो वै रामचन्द्रः स भगवान् ये देवीसरस्वती तस्मै वै नमो नमः भूर्भुवः स्वः
ॐ सर्वे वै देवा देवीमुपतस्थुः कासि त्वं महादेवीति। साब्रवीत्- अहं ब्रह्मस्वरूपिणी। मत्तः प्रकृतिपुरुषात्मकं जगत्। शून्यं चाशून्यं च॥
ॐ सूर्यज्योतिषे नमः
असौ योऽवसर्पति नीलग्रीवो विलोहितः। उतैनं गोपा अदृशन्नदृशन्नुदहार्यः। उतैनं विश्वा भूतानि स दृष्टो मृडयाति नः॥