ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
शास्त्रीय पौराणिक मंत्र

श्रीहरिः पातु ते वक्त्रं मस्तकं मधुसूदनः । श्रीकृष्णश्चक्षुषी पातु नासिकां राधिकापतिः ॥

श्रीहरिः पातु ते वक्त्रं मस्तकं मधुसूदनः । श्रीकृष्णश्चक्षुषी पातु नासिकां राधिकापतिः ॥

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

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प्रकारश्रीकृष्ण कवच (श्लोक-मन्त्र 1) / संरक्षण मन्त्र
स्वरूपश्री हरि, मधुसूदन, कृष्ण, राधिकापति
अर्थ एवं भावार्थ

इस मंत्र का अर्थ

श्री हरि तुम्हारे मुख की, मधुसूदन मस्तक की, श्रीकृष्ण नेत्रों की और राधिकापति नासिका की रक्षा करें 19।

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

मुख, मस्तक, नेत्र और नासिका की सभी भौतिक एवं अदृश्य शक्तियों से रक्षा

02

यह कवच भय और चिन्ता को दूर करता है

विस्तृत लाभ

मुख, मस्तक, नेत्र और नासिका की सभी भौतिक एवं अदृश्य शक्तियों से रक्षा। यह कवच भय और चिन्ता को दूर करता है 19।

जप काल

यात्रा से पूर्व या संकट के समय, शरीर के अंगों का स्पर्श (न्यास) करते हुए इसका पाठ किया जाता है 19।

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