ॐ श्रीं कृष्णाय श्रीं । श्रीं श्रीं गोविन्दाय गोपालाय गोलोक... श्रीम नरसिंहवपुषे नमः
ॐ श्रीं कृष्णाय श्रीं । श्रीं श्रीं गोविन्दाय गोपालाय गोलोक सुन्दराय सत्याय नित्याय परमात्मने पराय वैखानसाय विराजमूर्तये मेघात्मने श्रीम नरसिंहवपुषे नमः
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
ॐ, 'श्रीं' बीज स्वरूप कृष्ण, गोविन्द, गोपाल, गोलोक-सुन्दर, सत्य, नित्य, परमात्मा, विराट-मूर्ति और नरसिंह वपु (शरीर) वाले भगवान को नमस्कार है 42।
इस मंत्र से क्या होगा?
यह मन्त्र भगवान विष्णु के विभिन्न अवतारों का आह्वाहन करता है
इसके 91 दिन के अनुष्ठान से व्यक्ति को अधिकतम सुरक्षा, बुराइयों से मुक्ति और ऐश्वर्य (श्रीं बीज के कारण) प्राप्त होता है
विस्तृत लाभ
यह मन्त्र भगवान विष्णु के विभिन्न अवतारों का आह्वाहन करता है। इसके 91 दिन के अनुष्ठान से व्यक्ति को अधिकतम सुरक्षा, बुराइयों से मुक्ति और ऐश्वर्य (श्रीं बीज के कारण) प्राप्त होता है 42।
जप काल
91 दिनों के अनुष्ठान के रूप में तान्त्रिक विधान से 42।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ हौं जूं सः ॐ भूर्भुवः स्वः ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात् ॐ स्वः भुवः भूः ॐ सः जूं हौं ॐ॥
हरिद्रां चतुर्बाहुं हरिद्रावदनं प्रभुम् । पाशाङ्कुशधरं देवं मोदकं दन्तमेव च ॥ भक्ताभयप्रदातारं वन्दे विघ्नविनाशनम् ॥
ॐ द्विषण्णेत्राय नमः
ॐ सर्वबन्धविमोक्त्रे नमः
ॐ ऋषिप्रवरवन्द्याय नमः
ॐ तपोरूपाय विद्महे ब्रह्मचारिणे धीमहि तन्नो वामनः प्रचोदयात्।