शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
कार्तिकेय गायत्री मंत्र
ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महासेनाय धीमहि तन्नः षण्मुखः प्रचोदयात्
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपदेवसेनापति / षण्मुख
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
हम परम पुरुष महासेन (देवसेनापति) का ध्यान करते हैं। वे षण्मुख भगवान हमें सन्मार्ग पर प्रेरित करें।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
नेतृत्व क्षमता (Leadership), साहस व मेधा वृद्धि
विस्तृत लाभ
नेतृत्व क्षमता (Leadership), साहस व मेधा वृद्धि।
जप काल
सूर्योदय के समय नित्य जप।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ कण्ठं मे पातु नृहरिर्भूभृदनन्तकोटनः
ॐ लोकाध्यक्षाय नमः
ॐ गोकुलानन्ददायिन्यै नमः
ॐ कलनादनिनादस्थायै नमः
सरस्वति महाभागे विद्ये कमललोचने। विद्यारूपे विशालाक्षि विद्यां देहि नमोऽस्तु ते॥
रक्तो रक्ताङ्गरागां शुक कुसुमायुत तुन्दिलश्चन्द्रमौलिः नेत्रैर्युक्तस्त्रिभिर्वामनकरचरणो बीजपूरं दधानः । हस्ताग्रक्लृप्त पाशाङ्कुश शरवरदो नागवक्त्रो हि भूषो देवः पद्मासनस्थो भवतु सुखकरो भूतये विघ्नराजः ॥