शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
श्रीकृष्ण मंत्र
ॐ वज्रदेहाय वज्राय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपदेह रक्षा
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
वज्र के समान शरीर वाले को नमस्कार है। (भौतिक आघातों से पूर्ण सुरक्षा)।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ ह्रां ह्रीं ॐ नमो भगवते महा-वीर-वीराय सर्वदुःख निवारणाय ग्रहमण्डल सर्वभूतमण्डल सर्व-पिशाच-मण्डलोच्चाटन भूत-ज्वर एकाहिक-ज्वर द्वयाहिक-ज्वर त्र्याहिक-ज्वर चातुर्थिक-ज्वर संताप-ज्वर विषम-ज्वर ताप-ज्वर माहेश्वर-वैष्णव-ज्वरान् छिन्दि-छिन्दि यक्ष ब्रह्मराक्षस भूत-प्रेत-पिशाचान् उच्चाटय-उच्चाटय स्वाहा।
ॐ अष्टमूर्तये नमः
देवराजसेव्यमानपावनाङ्घ्रिपङ्कजं व्यालयज्ञसूत्रमिन्दुशेखरं कृपाकरम्।
ॐ विक्रान्तायै नमः
ॐ पीतवाससे नमः
मया सो अन्नमत्ति यो विपश्यति यः प्राणिति य ईं शृणोत्युक्तम्। अमन्तवो मां त उप क्षियन्ति श्रुधि श्रुत श्रद्धिवं ते वदामि॥