शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
श्रीकृष्ण मंत्र
ॐ ज्वालाचक्राय स्वाहा – शिरसे स्वाहा
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
जप काउंटर लोड हो रहा है...
स्वरूपशिर-न्यास / ज्वालाचक्र
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
ज्वाला-चक्र को स्वाहा, वे मेरे सिर पर स्थापित हों। (विचारों को नकारात्मकता से बचाना)।
इसे भी पढ़ें
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र