शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
त्रैलोक्यमोहनकर गणेश मंत्र
वक्रतुण्डायै क्लीं क्लीं क्लीं गं गणपते वरवरद सर्वजनं मे वशमानय स्वाहा ॥
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारतांत्रिक आकर्षण मंत्र
स्वरूपत्रैलोक्यमोहन गणेश
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
हे वक्रतुण्ड गणपति, संपूर्ण जनमानस को मेरे वशीभूत करें।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
तीनों लोकों में प्रचंड वशीकरण और आकर्षण शक्ति की वृद्धि
विस्तृत लाभ
तीनों लोकों में प्रचंड वशीकरण और आकर्षण शक्ति की वृद्धि।
जप काल
आकर्षण और मोहन कर्म के तांत्रिक प्रयोगों में।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ यो वै रामचन्द्रः स भगवान् ये देवासुरमनुष्यबोधः तस्मै वै नमो नमः भूर्भुवः स्वः
ॐ राजराजेश्वरीपुत्राय नमः
ॐ विजितेन्द्रियाय नमः
ॐ श्रीमते नमः
ब्रह्मासि रुद्रस्त्वमिन्द्रस्त्वमग्निस्त्वं वायुस्त्वं सूर्यस्त्वं चन्द्रमास्त्वं ब्रह्मभूर्भुवःस्वरोम्॥
ऐं क्लीं सौः श्रीं ह्रीं कामेश्वर ह्रीं श्रीं सौः क्लीं ऐं।