शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
श्रीकृष्ण मंत्र
ॐ वातरोगहराय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपवैद्यनाथ
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
वात आदि शारीरिक रोगों को हरने वाले वैद्य स्वरूप को नमन।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
जोड़ों के दर्द, गठिया व वात-व्याधियों से शारीरिक मुक्ति
विस्तृत लाभ
जोड़ों के दर्द, गठिया व वात-व्याधियों से शारीरिक मुक्ति।
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कमले कमलाक्षवल्लभे त्वं करुणापूरतरङ्गितैरपाङ्गैः। अवलोकय मामकिञ्चनानां प्रथमं पात्रमकृत्रिमं दयायाः॥
ॐ जयन्ती मङ्गला काली भद्रकाली कपालिनी। दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तुते॥
अनङ्गरङ्गमङ्गलप्रसङ्गभङ्गुरभ्रुवां सविभ्रमससम्भ्रमदृगन्तबाणपातनैः। निरन्तरं वशीकृतप्रतीतनन्दनन्दने कदा करिष्यसीह मां कृपाकटाक्षभाजनम्॥
ॐ सहस्रबाहवे नमः
ॐ महते नमः
ॐ मृगपाणये नमः