श्रीकृष्ण मंत्र
ॐ वातरोगहराय नमः
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
वात आदि शारीरिक रोगों को हरने वाले वैद्य स्वरूप को नमन।
इस मंत्र से क्या होगा?
जोड़ों के दर्द, गठिया व वात-व्याधियों से शारीरिक मुक्ति
विस्तृत लाभ
जोड़ों के दर्द, गठिया व वात-व्याधियों से शारीरिक मुक्ति।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ सर्वायुधविशारदाय नमः
पूरो मंत्र ईश्वरों वाचा ओम हनुमत वेदर वेग वेग आओ अमुक बंधी को बंधन से छुड़ाओ भेड़ी तोड़ो ताला तोड़ो बंधन धन तोड़ो मोडा अमुक बंधी को बंधन से छुड़ाओ मेरी भक्ति गुरु की शक्ति। पूरो मंत्र ईश्वरों वाचा।
बालार्कारुणकान्तिर्वामे बालां वहन् अङ्के । लसदिन्दीवर हस्तं गौराङ्गीं रत्नशोभाढ्याम् ॥ दक्षे अङ्कुश वरदानं वामे पाशं च पायसं पात्रम् । नीलांशुक समान पीठपद्मारुणे तिष्ठन् संकटहरणः पायात् ॥
य इदं कवचं श्रीदं पठेद्विष्णुप्रियात्मकम्। त्रैलोक्यं विजितं तेन येन वा धारितं भवेत्॥
ॐ कृष्णमन्त्राधिदेवतायै नमः
ॐ पितृस्तुताय नमः