ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
शास्त्रीय पौराणिक मंत्र

माँ लक्ष्मी मंत्र

आदित्यवर्णे तपसोऽधिजातो वनस्पतिस्तव वृक्षोऽथ बिल्वः। तस्य फलानि तपसानुदन्तु मायान्तरायाश्च बाह्या अलक्ष्मीः॥

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

जप काउंटर लोड हो रहा है...

प्रकारवनस्पति (बिल्व) मंत्र
स्वरूपआदित्यवर्णा
अर्थ एवं भावार्थ

इस मंत्र का अर्थ

हे सूर्यवर्णा! आपके तप से बिल्व वृक्ष उत्पन्न हुआ। उसके फल मेरे आंतरिक और बाह्य अलक्ष्मी को दूर करें।

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

आंतरिक अज्ञान व बाह्य दरिद्रता का नाश

विस्तृत लाभ

आंतरिक अज्ञान व बाह्य दरिद्रता का नाश।

जप काल

बिल्व वृक्ष के समीप स्मरण।

इसे भी पढ़ें

अन्य देवताओं के मंत्र

प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र